निवेशकों के 90,000 करोड़ रुपए पर संकट

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नई दिल्ली

नैशनल कम्पनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एन.सी.एल.ए.टी.) ने गत दिवस बैंक इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनैंशियल सर्विसेज (आई.एल.एंड एफ.एस.) को दिए गए कर्ज को नॉन-परफॉर्मिंग एसैट (एन.पी.ए.) घोषित करने की इजाजत दे दी है। चेयरमैन जस्टिस एस.जे. मुखोपाध्याय की बैंच ने उस प्रतिबंध को हटा दिया है जिससे कर्ज में लदी आई.एल. एंड एफ.एस. और उसकी 300 ग्रुप कम्पनीज को दिए कर्ज को बैंक एन.पी.ए. घोषित नहीं कर पा रहे थे। हालांकि एन.सी.एल.ए.टी. ने यह इजाजत कुछ शर्तों के साथ दी है। अपीलेट ट्रिब्यूनल ने साफ  कहा है कि बैंक आई.एल. एंड एफ.एस. को दिए कर्ज को एन.पी.ए. घोषित कर सकते हैं लेकिन वह कर्ज की वापसी या रुपयों की रिकवरी के लिए कोई प्रक्रिया शुरू नहीं कर सकते हैं। बैंच ने कहा है कि जब तक आई.एल. एंड एफ.एस. और उसकी ग्रुप कम्पनियों की ओर से समाधान प्रस्ताव पेश नहीं किया जाता है तब तक बैंक अपना समर्थन नहीं हटा सकते हैं। इस समय आई.एल. एंड एफ.एस. ग्रुप की कम्पनियां 90,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के कर्ज से मुक्ति पाने के लिए समाधान प्रक्रिया का सामना कर रही हैं।

एन.सी.एल.ए.टी. से जुड़े मामलों के जानकार और सी.ए. मनीष गुप्ता का कहना है कि इस फैसले का बड़ा व्यापक प्रभाव पड़ेगा। मनीष के अनुसार 90,000 करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज एन.पी.ए. घोषित होने से बैंकों की बैलेंस शीट पर असर पड़ेगा। इसके अलावा कर्ज देने वाले बैंकों के शेयरों में भी गिरावट हो सकती है। इससे लाखों-करोड़ों निवेशकों की गाढ़ी कमाई पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं। साथ ही आई.एल. एंड एफ.एस. से जुड़ी कम्पनियों के म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के रिटर्न पर भी असर पड़ सकता है। मनीष के अनुसार करीब 20 बैंकों ने आई.एल. एंड एफ.एस. को कर्ज दिया है जिसमें सरकारी और गैर-सरकारी दोनों तरह के बैंक शामिल हैं।        

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