समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को लेकर विधानसभा में हंगामा

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समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को लेकर विधानसभा में हंगामा

रायपुर

छत्तीसगढ़ विधानसभा में छठवें दिन सोमवार को एक बार फिर समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का मुद्दा जोर-शोर से उठा। बहुजन समाज पार्टी के विधायक केशव चंद्रा ने पूछा कि जांजगीर-चांपा में वर्ष 2019 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदने के लिए कितने किसानों का पंजीयन किया गया है?इसमें से कितने किसानों का रकबा काटा गया है? जवाब देते हुए राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि जांजगीर-चांपा में वर्ष 2019 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए 173205 किसानों का पंजीयन किया गया। इनमें से 26969 नए पंजीयन हंै धान खरीदी के लिए पंजीकृत और रिकॉर्ड के अनुसार वास्तविक होने के कारण 20254 किसानों का रकबा संशोधन राजस्व रिकार्ड के अनुसार किया गया।

बसपा विधायक केशव चंद्रा ने कहा कि किसानों को जानकारी दिए बगैर ही उनका रकबा घटा दिया गया है। कई किसान रकबा कम करने की वजह से धान बेच नहीं पाए। केशव चंद्रा के सवाल पर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने कहा कि पूरे प्रदेश में किसानों के रकबा को काटा गया है। सरकार इसे स्वीकार करे। इस पर राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने जवाब दिया कि पंजीयन से पहले सत्यापन की कार्रवाई नहीं होती है। कहीं भी गलत ढंग से रकबा नहीं काटा गया है। इस पर विधायक चंद्रा ने कहा कि सरकार षड्यंत्र कर किसानों का रकबा काट रही है। ताकि उन्हें समर्थन मूल्य ना देना पड़े। राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने जवाब दिया कि किसी का भी रकबा नहीं काटा गया है। पंजीयन के आधार पर जांच की गई और संशोधन किया गया। 554 किसानों के रकबे में वृद्धि की गई है।

भाजपा विधायक नारायण चंदेल ने पूछा कि जो रकबा काटा गया है वह क्या सरकार के निर्देश पर काटा गया? अधिकारियों ने अपने मन से ही काट दिया? इस पर मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि किसी का भी रकबा नहीं काटा गया है। जांच और संशोधन के आधार पर ही सत्यापन किया गया।किसानों के पास हेल्पलाइन नंबर और आवेदन करने की सुविधा थी। किसानों का रकबा काटे जाने को लेकर भाजपा सदस्यों ने भी सवाल उठाए। आरोप लगाया कि धान नहीं खरीदना पड़े इसलिए जानबूझकर किसानों का रकबा काट दिया। किसी भी जगह भौतिक सत्यापन के लिए अधिकारी नहीं गए। दफ्तर में बैठकर सरकार के निर्देश पर किसानों का रकबा काट दिया।नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को तो हम सभी दमदार मंत्री मानते हैं. फिर भी वह सही तरीके से जवाब नहीं दे रहे हैं. पूरे प्रदेश में रकबे काटे गए. किसान अपना धान नहीं बेच पाए. पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे कारोबारी परिवार से आते हैं.वह कृषि नहीं करते इसलिए उन्हें राहत मिलना चाहिए। अजीत जोगी पर पलटवार करते हुए जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि मेरा पूरा परिवार कृषि करता है. राजनीति में सक्रिय होने की वजह से मैं कृषि से जरूर अलग हूं लेकिन मुझे इस संबंध में जानकारी है.उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस बार 82 लाख 80 हजार मीट्रिक टन धान की खरीदी की है. सरकार की प्रशंसा होनी चाहिए कहीं पर भी रकबे नहीं काटे गए।

धान खरीदी केंद्रों में बारदानों की कमी को लेकर नाराज किसान सड़क पर आ गए, उन पर पुलिस की लाठियां बरस गई और इधर सरकार विधानासभा में कहती है की बारदाने की कमी को लेकर कोई शिकायत ही उन तक नहीं पहुंची। आज विधानसभा में वरिष्ठ भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल द्वारा इस संबंध में चाही गई जानकारी पर आदिम जाति विकास मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम ने लिखित जवाब में यह बात कही। बृजमोहन अग्रवाल ने जानना चाहा कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में समर्थन मूल्य पर कितनी सहकारी समिति से धान की खरीदी की जा रही है? समितियों में कितना बारदाना सप्लाई किया जा रहा है और यह बारदाना कहां-कहां से किस आधार पर खरीदा गया है? बृजमोहन ने यह भी जानकारी चाही की बारदानों की कमी के संबंध में किन-किन समितियों से शिकायत आई थी? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या समितियों द्वारा किसानों से तौल में अधिक लेने की शिकायत भी प्राप्त हुई है? यदि हुई है तो कहां कहां जांच पर जांच बिठाई गई है? श्री अग्रवाल ने यह भी पूछा कि समितियों में प्रतिदिन एक किसान से कितने क्विंटल धान खरीदने के निर्देश थे और यह निर्देश किसने जारी किए थे? बृजमोहन अग्रवाल के उक्त सवालों पर प्रदेश सरकार के आदिम जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने लिखित जवाब में बताया कि वित्तीय वर्ष 2019- 20 में समर्थन मूल्य पर 1288 सहकारी समितियों द्वारा धान खरीदी की जा रही है। इन समितियों में 450, 260 गठान बारदाना आपूर्ति की गई है। नए बारदाने की खरीदी जुट कमिश्नर वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार से तथा पुराने बारदाने की आपूर्ति मिलरों एवं पीडीएस दुकानों से की गई है।