रियल्टी बिजनैस से निकल जाएगा इंडियाबुल्स ग्रुप, 1,800 करोड़ रुपए में बेचेगा लंदन की प्रॉपर्टी

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नई दिल्ली

इंडियाबुल्स रीयल एस्टेट लंदन में अपनी संपत्ति को अपने प्रवर्तकों को 20 करोड़ ब्रिटिश पौंड (करीब 1,800 करोड़ रुपए) में बेचेगी। कंपनी ने भारत में कारोबार पर ध्यान देने और कर्ज में कटौती की रणनीति के तहत यह कदम उठाया है। वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही अंत में कंपनी पर कुल 4,590 करोड़ रुपए का कर्ज है। इस सौदे के पूरे होने के बाद कर्ज की रकम घटकर 3,000 करोड़ रुपए रह जाएगी। इंडियाबुल्स रीयल एस्टेट ने कहा, ‘‘कंपनी ने सिर्फ मुम्बई और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एन.सी.आर.) बाजारों पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है और इसलिए उसने सैंचुरी लिमिटेड को अलग करने का फैसला किया है। इस कंपनी के पास लंदन में हनोवर स्क्वायर संपत्ति है।’’

कंपनी ने लंदन स्थित इस संपत्ति को 16.15 करोड़ पौंड में खरीदा था और वर्तमान में उसकी कीमत 18.9 करोड़ पौंड है। इस बीच इंडियाबुल्स रीयल एस्टेट का एकीकृत शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में 95 प्रतिशत गिरकर 108.56 करोड़ रुपए रह गया। समीक्षाधीन अवधि के दौरान कंपनी की कुल आय गिरकर 2,040.61 करोड़ रुपए रह गई। पूरे वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान उसका शुद्ध लाभ गिरकर 504 करोड़ रुपए रहा, जो 2017-18 में 2,372.84 करोड़ रुपए रहा था। इस दौरान उसकी कुल आय 2017-18 में 4,731.84 करोड़ से बढ़कर 2018-19 में 5,222.93 करोड़ रुपए हो गई।

घर खरीदारों के लिए पहले से तैयार मकान यानी रैडी-टू-मूव इन फ्लैट अब भी पसंदीदा विकल्प बने हुए हैं। हालांकि वस्तु एवं सेवा कर (जी.एस.टी.) की दरों में कटौती से नई आवासीय परियोजनाओं में बन रहे मकानों की मांग में भी सुधार आया है। संपत्ति से संबंधित परामर्श देने वाली फर्म एनारॉक ने एक सर्वेक्षण में यह बात कही। एनारॉक ने 2019 की पहली छमाही में उपभोक्ता रुख सर्वेक्षण में कहा कि रीयल एस्टेट कानून ‘रेरा’ और जी.एस.टी. की दरों में कमी से लोगों का नई संपत्तियों पर भरोसा वापस से जगाने में मदद मिली है। फर्म ने सर्वेक्षण में पाया कि 70 प्रतिशत प्रतिभागी 80 लाख रुपए तक की संपत्ति खरीदना पसंद करते हैं। सर्वेक्षण के मुताबिक कई घर खरीदारों के लिए पहले से तैयार घर अब भी पहली पसंद बने हुए हैं लेकिन नए घरों की मांग में भी सुधार हुआ है। 18 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों ने नई संपत्तियों में रुचि दिखाई है। इसकी तुलना में पिछले सर्वेक्षण में यह आंकड़ा महज 5 प्रतिशत था।

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