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Saturday, April 20, 2024

1978 में पहला केस, 1986 में हत्या का मामला; 46 साल से मुख्तार अंसारी चला रहा था जुर्म का सिंडिकेट

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Mukhtar Ansari News: गैंगस्टर से राजनीति में कदम रखने वाले डॉन मुख्तार अंसारी की गुरुवार मौत हो गई। तबीयत खराब होने के बाद मुख्तार को बांदा के मेडिकल कॉलेज लाया गया, जहां इलाज के दौरान मुख्तार अंसारी ने दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि दिल का दौरा पड़ने की वजह से मुख्तार अंसारी की मौत हुई है। मुख्तार अंसारी 2005 से ही जेल में थे। उत्तर प्रदेश के मऊ से पांच बार के पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी के खिलाफ 60 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। इनमें से कई मामले 46 साल पुराने हैं। मुख्तार पर उत्तर प्रदेश और दिल्ली में दर्ज 60 मामलों में से 16 मामले हत्या के थे। स्वतंत्रता सेनानियों, राजनेताओं और रक्षा क्षेत्र के दिग्गजों के परिवार से आने वाले मुख्तार ने शुरुआत में ही अपराध की दुनिया में प्रवेश कर चुके थे। मुख्तार के खिलाफ पहला मामला 1978 में दर्ज किया गया था। जबकि उनके खिलाफ हत्या का पहला मामला 1986 में दर्ज किया गया था।

सालों से चल रहा था मुख्तार के अपराधों का सिंडिकेट

दशकों तक दबंगई, आतंक, हत्या और जबरन वसूली जैसे कई आपराधिक मामलों में नामजद अंसारी की मुश्किलें 2022 में और बढ़ गईं जब उन्हें इन मामलों में दोषी ठहराया गया। सितंबर 2022 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया और मुख्तार अंसारी को एक जेलर को धमकी देने के लिए सात साल की सजा सुनाई। मुख्तार पर सात साल की सजा और 37,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

अवधेश राय हत्याकांड के मुख्तार से खौफ काने लगे बड़े-बड़े सूरमा

अपराध और राजनीति की दुनिया में मुख्तार अंसारी की शुरुआत पूर्वी उत्तर प्रदेश में ठेकों को लेकर लड़ाई से शुरू हुई। मुख्तार अंसारी और माफिया ब्रिजेश सिंह 1980 और 1990 के दशक में एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन हुआ करते थे। वर्चस्व की लड़ाई के परिणामस्वरूप मुख्तार अंसारी ने 1991 में एक स्थानीय राजनेता और मौजूदा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के भाई अवधेश राय की हत्या कर दी। यह उन आठ मामलों में से एक है जिसके लिए अंसारी को दोषी ठहराया गया था और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। 

अवधेश राय की हत्या के बाद पूर्वांचल के अपराध जगत में मुख्‍तार अंसारी का बड़ा नाम हो गया। बड़े-बड़े सूरमा उससे खौफ खाने लगे। इसके बाद ठेकेदारी से लेकर रंगदारी तक हर तरह के आरोप मुख्तार गैंग पर लगते चले गए। उधर, अवधेश के छोटे भाई अजय राय ने मुख्तार अंसारी, पूर्व विधायक अब्दुल कलाम, भीम सिंह, कमलेश सिंह और राकेश के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया। अजय राय और उनके परिवार ने 32 साल लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ी।

गायब हो गई थी ओरिजिनल फाइल

अवधेश राय हत्याकांड की ओरिजिनल फाइल ही गायब हो गई थी। यह एक ऐसा मामला है जिसमें बिना ऑरिजिनल केस डायरी के अदालत ने सुनवाई की और आरोपी को सजा सुनाई। ओरिजिनल फाइल गायब कराने का इल्जाम भी मुख्तार पर लगा था। उस पर इसे लेकर अलग से एक केस दर्ज किया गया था। बताते हैं कि केस डायरी गायब होने की वजह से भी अवधेश राय हत्याकांड की सुनवाई में लंबा वक्त लगा। इस मामले में वाराणसी की विशेष एमपी/ एमएलए अदालत ने बीते साल 19 मई को बहस के बाद सुनवाई पूरी कर ली थी और आदेश को पांच जून तक के लिए सुरक्षित रख लिया था।  

इसके अलावा कई अन्य मुख्य मामलों में भी मुख्तार अंसारी का नाम शामिल था। मुख्तार 2005 में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय और छह अन्य की हत्या में भी शामिल थे। मऊ दंगों के दौरान, अंसारी और उनके भाई अफजल समेत पांच अन्य पर हत्या का मामला दर्ज किया गया था। 2005 में इस मामले में उन्हें जेल हो गई और तब से मुख्तार अंसारी कभी बाहर नहीं निकले और गुरुवार को हिरासत में ही उनकी मौत हो गई।

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