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Tuesday, March 5, 2024

मारन के बयान पर मनोज तिवारी ने दी प्रतिक्रिया, बोले- देश की जनता सिखाएगी सबक

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Image Source : PTI
उदयनिधि मारन के बयान पर बोले मनोज तिवारी

डीमके के सांसद उदयनिधि मारन ने उत्तर भारतीयों को लेकर एक विवादित टिप्पणी की है। इस मामले पर अब राजनीति गरमा गई है। इस मामले पर बाजपा सांसद मनोज तिवारी ने अब बयान दिया है। मनोज तिवारी ने कहा, इस तरह का बयान अपमानजनक है। देश में हिंदी भाषा बोलने वालों का यह बड़ा अपमान है। इस तरह की बयानबाजी पर कार्रवाई की जानी चाहिए। विपक्षी गठबंधन के लोगों को देश की जनता देख रही है। लोकसभा चुनाव 2024 में देश की जनता उन्हें इसका जवाब देगी। बता दें कि उदयनिधि मारन ने अपने बयान में कहा था कि हिंदी पट्टी के लोग तमिलनाडु में शौचालय साफ कर रहे हैं और अन्य छोटे-मोटे काम कर रहे हैं। 

मारन के बयान पर गरमाई सियासत

वहीं इस मामले पर सांसद सुशील मोदी ने कहा, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को इस बयान को लेकर चुप्पी तोड़नी चाहिए। डीएमके को इंडी गठबंधन से बाहर निकाल देना चाहिए। इस तरह का बयान कोई पहली बार नहीं आया है। वो चाहते हैं कि उत्तर और दक्षिण भारतीयों के बीच में दरार आ जाए। बता दें कि उदयनिधि मारन के बयान पर बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी थी। तेजस्वी यादव ने इस बाबत बयान देते हुए कहा था कि द्रमुख ऐसी पार्टी है जो सामाजिक न्याय में विश्वास करती है और ऐसी पार्टी के नेता के लिए इस तरह की टिप्पणी करना अशोभनीय है।

नेताओं ने किया पलटवार

राजद नेता ने कहा, ‘‘अगर द्रमुक सांसद ने जातीय अन्याय को उजागर किया होता, अगर उन्होंने बताया होता कि केवल कुछ सामाजिक समूहों के लोग ही ऐसी खतरनाक काम करते हैं, तो इसका कोई मतलब होता।’’ यादव ने कहा, ‘‘लेकिन बिहार और उत्तर प्रदेश की पूरी आबादी के बारे में अपमानजनक बातें करना निंदनीय है। हम इसकी निंदा करते हैं। हमारा मानना है कि लोगों को देश के अन्य हिस्सों से आने वालों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए।’’ माना जाता है कि यादव के स्टालिन के साथ व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं। राजद नेता यादव ने कहा, ‘‘हम द्रमुक को एक ऐसी पार्टी के रूप में देखते हैं जो सामाजिक न्याय के हमारे आदर्श में यकीन करती है। इसके नेताओं को ऐसी बातें कहने से बचना चाहिए जो इस आदर्श के विपरीत हों।’’ मारन के तमिल में दिए हालिया भाषण को लेकर विवाद पैदा हो गया है, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अंग्रेजी शिक्षा के महत्व पर जोर दिया था। 

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