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Friday, April 19, 2024

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट को आजीवन कारावास: कोर्ट ने गैंगस्टर लखन भैया की हत्या का दोषी माना

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मुंबई56 मिनट पहले

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साल 2006 में पुलिस हिरासत में लखन भैया का मर्डर कर दिया गया था और घटना को एनकाउंटर दर्शाया गया  था। - Dainik Bhaskar

साल 2006 में पुलिस हिरासत में लखन भैया का मर्डर कर दिया गया था और घटना को एनकाउंटर दर्शाया गया था।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 19 मार्च को पूर्व पुलिसकर्मी और विवादास्पद एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उन्हें साल 2006 में गैंगस्टर छोटा राजन के करीबी सहयोगी रामनारायण गुप्ता उर्फ लखन भैया के फर्जी एनकाउंटर मामले में दोषी माना गया। इसी मामले में प्रदीप शर्मा को ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था।

जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति गौरी गोडसे की बेंच ने कहा, “अभियोजन पक्ष ने साबित कर दिया है कि हिरासत में रामनारायण गुप्ता को पुलिस ने मार दिया था और इसे वास्तविक मुठभेड़ की तरह दिखाया गया था।”

HC ने मामले में 12 पूर्व पुलिसकर्मियों और एक नागरिक सहित 13 अन्य आरोपियों की दोष सिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। पीठ ने पूर्व पुलिसकर्मी को तीन सप्ताह में ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया है।

दोषी ठहराए गए आरोपियों में पूर्व पुलिसकर्मी नितिन सरतापे, संदीप सरकार, तानाजी देसाई, प्रदीप सूर्यवंशी, रत्नाकर कांबले, विनायक शिंदे, देवीदास सपकाल, अनंत पटाडे, दिलीप पलांडे, पांडुराग कोकम, गणेश हरपुडे, प्रकाश कदम और आम नागरिक हितेश सोलंकी शामिल हैं।

कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने प्रदीप शर्मा के खिलाफ उपलब्ध सबूतों को नजरअंदाज कर दिया गया। मामले में जो सबूत हैं उससे प्रदीप की संलिप्तता स्पष्ट रूप से साबित होती नजर आई।

कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने प्रदीप शर्मा के खिलाफ उपलब्ध सबूतों को नजरअंदाज कर दिया गया। मामले में जो सबूत हैं उससे प्रदीप की संलिप्तता स्पष्ट रूप से साबित होती नजर आई।

HC ने ट्रायल कोर्ट का आदेश खारिज किया
बेंच ने अपने फैसले में कहा, ”कानून के रक्षकों-संरक्षकों को वर्दी में अपराधियों के रूप में कार्य करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है और अगर इसकी अनुमति दी गई तो इससे अराजकता फैल जाएगी।”​​​​​​

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने “विश्वसनीय, ठोस और कानूनी रूप से स्वीकार्य सबूत के साथ फर्जी मुठभेड़ में गुप्ता के अपहरण, गलत कारावास और हत्या को साबित कर दिया है।

बेंच ने सबूतों के अभाव में प्रदीप शर्मा को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के 2013 के फैसले को विकृत और अस्थिर मानते हुए रद्द कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने प्रदीप शर्मा के खिलाफ उपलब्ध सबूतों को नजरअंदाज कर दिया गया। मामले में जो सबूत हैं उससे प्रदीप की संलिप्तता स्पष्ट रूप से साबित होती नजर आई।

11 नवंबर 2006 को पुलिस हिरासत में रामनारायण गुप्ता उर्फ लखन भैया की मौत हो गई थी।

11 नवंबर 2006 को पुलिस हिरासत में रामनारायण गुप्ता उर्फ लखन भैया की मौत हो गई थी।

घटना 11 नवंबर 2006 की है
दरअसल, 11 नवंबर 2006 को पुलिस टीम ने नवी मुंबई के वाशी इलाके से रामनारायण गुप्ता उर्फ ​​लखन भैया को उसके दोस्त अनिल भेड़ा को उठाया था। उसी शाम पश्चिमी मुंबई के वर्सोवा के पास एक फर्जी मुठभेड़ में लखन को मार दिया था।

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस अधिकारी जो कानून के रक्षक हैं। उसने फर्जी मुठभेड़ में रामनारायण गुप्ता का अपहरण और हत्या की और इसे वास्तविक मुठभेड़ का रंग देकर अपने पद का घोर दुरुपयोग किया है। पीठ ने आगे कहा कि पुलिस हिरासत में मौत पर सख्ती से अंकुश लगाया जाना चाहिए और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

बेंच ने कहा कि इसमें नरमी के लिए कोई जगह नहीं हो सकती, क्योंकि इसमें शामिल व्यक्ति यानी पुलिस से हैं। जिनका कर्तव्य नागरिकों की रक्षा करना है न कि कानून को अपने हाथ में लेना और उनके खिलाफ गंभीर अपराध करना।”

मनसुख हिरन हत्या मामले में दोषी है प्रदीप शर्मा
प्रदीप शर्मा साल 2021 में मुकेश अंबानी के आवास के बाहर जिलेटिन की छड़ों की बरामदगी से संबंधित व्यवसायी मनसुख हिरन की हत्या के मामले में भी आरोपी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मामले में जमानत दे दी।

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