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Anupama 19th March Written Update 2025: प्रेम का गुम हुआ पत्र, रद्द हुआ एडमिशन और रिश्तों में पनपता शक- आखिर कौन उनके सपनों का दुश्मन बना? जब सच सामने आया, तो एक ऐसा नाम उजागर हुआ जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं क…और पढ़ें
अनुपमा में हुआ ड्रामा….(फोटो साभार- hotstar)
हाइलाइट्स
- प्रेम का पत्र वसुंधरा ने जलाया था.
- राही ने वसुंधरा पर विश्वासघात का आरोप लगाया.
- अनुपमा ने वसुंधरा की रूढ़िवादी सोच को चुनौती दी.
नई दिल्ली : कल के एपिसोड की शुरुआत होती है प्रेम के परेशान होने से, वो परेशान है कि उसका पत्र किसने लिया? उसे शक है कि इसे जानबूझकर छिपाया गया है. गुस्से में वो पराग से भिड़ जाता है, जबकि अनुपमा वसुंधरा पर शक जताती है. पराग इन आरोपों को खारिज करते हुए ताना मारता है कि वो प्रेम को धोखा देने के बजाय पूरा यूनिवर्सिटी खरीद लेगा. बहस तीखी हो जाती है, और वसुंधरा पराग का बचाव करते हुए प्रेम से आग्रह करती है कि वो माहौल न बिगाड़े.
प्रेम और राही अपने प्रवेश रद्द होने से टूट चुके हैं. वसुंधरा समझाने की कोशिश करती है कि प्रेम अगली बार फिर कोशिश कर सकता है, लेकिन राही नाराज है. उसे यकीन है कि किसी ने जानबूझकर उनके सपनों को तोड़ा है. वसुंधरा उन्हें आगे बढ़ने की सलाह देती है, लेकिन राही कहती है कि ये केवल दिखावा है- असल में कोई उनके सपनों की परवाह नहीं करता.
अनुपमा के अतीत की गूंज
राही की बात अनुपमा (Anupama) को अतीत में ले जाती है, जब उसके ससुरालवालों ने भी उसके सपनों को कुचल दिया था. वो तंज कसते हुए कहती है कि ‘समाज लड़कियों के लिए कभी नहीं बदलता.’ जब वसुंधरा इसे गलत बताकर टालने की कोशिश करती है, तो अनुपमा सवाल उठाती है.
प्रेम वसुंधरा से सीधे जवाब मांगता है, और वो आखिरकार स्वीकार करती है कि उसने ही पत्र जलाया था. प्रेम गुस्से से उसे अपने सपनों को नष्ट करने का दोषी ठहराता है, और राही इसे विश्वासघात करार देती है. गौतम का मानना है कि प्रेम और राही को ऐसी स्थिति का सामना करना ही चाहिए था.
रूढ़िवादी सोच के खिलाफ लड़ाई
अनुपमा सवाल उठाती है कि वसुंधरा ने उनके प्रवेश का विरोध क्यों किया. वसुंधरा अपनी रूढ़िवादी सोच स्वीकारते हुए कहती है कि ‘बहू की मां को चुप रहना चाहिए और दूर रहना चाहिए.’ ये सुनते ही अनुपमा और वसुंधरा के विचार टकरा जाते हैं. राही वसुंधरा पर आरोप लगाती है कि उसने न केवल प्रेम के भविष्य को बर्बाद किया बल्कि अनुपमा के सपनों को भी कुचल दिया.
वसुंधरा जोर देकर कहती है कि राही को घर संभालना चाहिए, यही उसका कर्तव्य है. फिर वो अनुपमा पर आरोप लगाती है कि उसने प्रेम और राही को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया और प्रेम का सम्मान नहीं किया. अनुपमा पलटकर जवाब देती है कि ‘महिलाएं अक्सर दूसरी महिलाओं का सपोर्ट नहीं करतीं, और यही सबसे बड़ी समस्या है.’
राही के सपनों की रक्षा की कसम
लीला वसुंधरा का सपोर्ट करती है और सवाल उठाती है कि राही को काम करने की क्या जरूरत है. अनुपमा उसे याद दिलाती है कि पहले उसने भी उसके करियर का विरोध किया था और सिर्फ हसमुख ने ही उसका सपोर्ट किया था. अनुपमा वसुंधरा को चुनौती देती है- ‘तुम प्रेम और राही की सोच को अपने हिसाब से नहीं बदल सकतीं. प्रेम वनराज की तरह नहीं है, वो राही का सपोर्ट करता है.’ वो राही के सपनों की रक्षा करने की कसम खाती है.
पराग अनुपमा की बातों को खारिज करता है, लेकिन अनुपमा उसे कड़ा जवाब देती है. वसुंधरा ऐलान करती है कि ‘अच्छी बहू को करियर से ज्यादा परिवार को प्राथमिकता देनी चाहिए,’ लेकिन अनुपमा दृढ़ता से उत्तर देती है- ‘जिसने कभी सपने देखे ही नहीं, वह सपनों का मूल्य क्या जाने?’