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OPINION: फिल्में न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि इन्हें संचार के सबसे बड़े माध्यम के रूप में भी देखा जाता है. चाहे हम संदेश की बात करें, या प्रेरणा और उत्साह की… मनोरंजन के साथ-साथ ये सभी चीजें हमें फिल्मों से…और पढ़ें
बच्चों के लिए फिल्में बनती रहनी चाहिए.
सिनेमा को मनोरंजन का सबसे बड़ा माध्यम कहना गलत नहीं होगा. मनोरंजन के साथ-साथ यह हमें बहुत कुछ सीखने का मौका भी देता है. फिल्मों में कुछ अच्छे संदेश छिपे होते हैं, जो हमें प्रेरित करते हैं और कुछ अच्छा करने के लिए. कई ऐसी फिल्में भी बनती हैं, जो हमें उत्साह देती हैं. सालों से बॉलीवुड में लव स्टोरी, एक्शन, हॉरर, सस्पेंस, बायोपिक के साथ-साथ बच्चों पर आधारित फिल्में बनती रही हैं, लेकिन पिछले 7 सालों से बच्चों के लिए फिल्में बननी बंद हो गई हैं. ऐसा क्यों हुआ? आइए इसे समझने की कोशिश करते हैं.
बच्चों पर आधारित आखिरी फिल्म ‘हिचकी’ साल 2018 में यानी कोविड महामारी से पहले सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल साबित हुई थी. 20 करोड़ में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर दुनियाभर में कुल 215 करोड़ की कमाई की थी, यानी अपने बजट से 10 गुना ज्यादा मुनाफा कमाया था. फिल्म में रानी मुखर्जी मुख्य भूमिका निभाती नजर आई थीं.
वैसे, 2003 में रिलीज हुई ‘कोई मिल गया’, 2007 में रिलीज हुई ‘तारे ज़मीन पर’, 2008 में रिलीज हुई ‘भूतनाथ’, 2010 में रिलीज हुई ‘आई एम कलाम’, 2011 में रिलीज हुई ‘स्टेनली का डब्बा’, 2011 में रिलीज हुई ‘चिल्लर पार्टी’, 2014 में रिलीज हुई ‘हवा हवाई’, 2015 में रिलीज हुई ‘निल बटे सन्नाटा’ और ‘धनक’ जैसी फिल्मों के निर्माताओं को कभी घाटा नहीं हुआ. बच्चों पर आधारित इन सभी फिल्मों का जादू बॉक्स ऑफिस पर भी देखने को मिला. तो जब ऐसी फिल्में मुनाफा कमा रही थीं, तो बच्चों के लिए फिल्में बनना क्यों बंद हो गईं? इसका जवाब है ‘ट्रेंड’. मुझे लगता है कि फिल्म जगत अब ट्रेंड के हिसाब से चल रहा है, लेकिन यह ट्रेंड कहां से आता है?
यह ट्रेंड बॉक्स ऑफिस पर सबसे सफल फिल्मों से बनता है या फिर सोशल मीडिया की चर्चा से. जैसा कि मैंने आपको बताया कि बच्चों पर बनी आखिरी फिल्म साल 2018 में रिलीज हुई थी. फिर 2019 में कोविड महामारी के बाद फिल्मों का बनना बंद हो गया, सभी सिनेमाघरों पर ताले लग गए. फिर 2021-22 से जब धीरे-धीरे हालात सामान्य होने लगे तो मेकर्स ने फिर से फिल्में बनानी शुरू कर दीं, लेकिन कोविड के बाद साउथ की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर छा गईं, यानी पैन इंडिया फिल्मों के सामने बॉलीवुड फिल्में चलनी बंद हो गईं, जैसे- आरआरआर, केजीएफ 2, पुष्पा 2. एक्शन से भरपूर ये साउथ की फिल्में भारतीय बॉक्स ऑफिस पर छा गईं, इसी से प्रेरित होकर बॉलीवुड में भी ऐसी फिल्में बनने लगीं, जैसे- पठान, जवान, एनिमल…
अब बॉलीवुड फिल्मों का असर फिर से बॉक्स ऑफिस पर दिखने लगा है. क्रूर एक्शन फिल्मों के बाद हॉरर-कॉमेडी और कॉमेडी फिल्मों का चलन शुरू हुआ, जो बॉक्स ऑफिस पर सफल रहीं, जैसे- मुंज्या, स्त्री 2. इसी बीच ओटीटी ने भी दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाई, जो बॉलीवुड के लिए एक और बड़ी चुनौती बनकर उभरा. सेंसरशिप न होने की वजह से डायरेक्टर और मेकर्स ने खुलकर ओटीटी के लिए वेब सीरीज और फिल्में बनानी शुरू कर दी. अब इन सब चीजों के बीच बच्चों के लिए बनने वाली फिल्में कहीं खो सी गईं. पिछले 7 सालों से सिनेमाघरों में ऐसी कोई फिल्म रिलीज नहीं हुई, जो बच्चों पर आधारित हो.
बॉलीवुड के हर डायरेक्टर और मेकर को ये ध्यान देने की जरूरत है कि बच्चों पर आधारित अब तक कई ऐसी फिल्में बनी हैं, जो बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों को भी पसंद आई हैं और अगर बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों पर भी नजर डालें तो इससे मेकर्स को नुकसान नहीं हुआ है, बल्कि फायदा ही हुआ है. इसलिए मेकर्स को बच्चों के लिए फिल्में बनाते रहना चाहिए.
New Delhi,Delhi
February 24, 2025, 14:50 IST
OPINION: बच्चों के लिए फिल्में बननी क्यों बंद हो गई हैं?