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Friday, March 28, 2025

अमिताभ बच्चन जब अपनी फिल्म का रिव्यू देख बौखलाए, घुमाया क्रिटिक को फोन, बुलाया घर और फिर…

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When Amitabh Bachchan Called Film Critic To His House: अमिताभ बच्चन इंडस्ट्री के उन एक्टर्स में से हैं, जिनके पंगेबाजी के किस्से ज्यादा सुनने को नहीं मिलते. विनम्र स्वभाव के बिग बी लेकिन एक बार फिल्म क्रिटिक्स …और पढ़ें

अमिताभ बच्चन ने फिल्म क्रिटिक्स को उनके पिता के साथ घर बुलाया था.

नई दिल्ली. अमिताभ बच्चन, जिन्होंने 1970 के दशक में कई एक्शन भूमिकाएं निभाईं, भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित एक्टर्स में से एक माने जाते हैं. उनके शुरुआती करियर में उनकी छवि ‘एंग्री यंग मैन’ की थी. लेकिन अमिताभ बच्चन हमेशा से ही एक विनम्र और पेशेवर व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं. अपने करियर में उन्होंने कई कल्ट फिल्में दी हैं. मगर उनकी फिल्मोग्राफी में कुछ ऐसी फिल्में भी रहीं जो बुरी तरह पिटी. क्रिटिक्स ने फिल्म की आलोचना की तो बिग बी ने रिव्यू पढ़ने के बाद उन्हें अपने घर में बुला लिया.

साल 1991 में अमिताभ बच्चन की एक फिल्म रिलीज हुई, जिसका नाम था ‘हम’. इस फिल्म को मुकुल एस आनंद ने डायरेक्ट किया था. फिल्म में अमिताभ के साथ-साथ रजनीकांत, गोविंदा और अनुपम खेर जैसे दिग्गज एक्टर थे. इस फिल्म के बारे में फिल्म क्रिटिक्स कोमल नाहटा ने भी लिखा. उन्होंने ‘हम’ के बारे में कुछ निगेटिव बातें लिखीं. रिव्यू देख अमिताभ ने तुरंत फोन लगाया और फिल्म क्रिटिक्स और ट्रेड एनालिस्ट कोमल नाहटा को अपने घर बुला लिया.

रिव्यू देख जब अमिताभ को आया गुस्सा
कोमल ने ANI के साथ बातचीत में अमिताभ बच्चन के साथ अपने ‘सबसे बड़े पंगे’ को याद किया. कोमल ने बताया कि वह अपने पिता रामराज नाहटा की ‘द ट्रेड मैगज़ीन’ के लिए फिल्म रिव्यू कर रहे थे. उन्होंने रिव्यू अपने पिता को दिया और इंटरनेशनल छुट्टी पर चले गए. हालांकि, जैसे ही वह वापस आए, उन्हें अमिताभ बच्चन का फोन आया. कोमल ने कहा कि उन्होंने अपने रिव्यू में लिखा था कि फिल्म देखने वालों को निराशा हो सकती है.

‘हमसे क्या गलती हुई है?’
उन्होंने साझा किया, ‘इसके तुरंत बाद, अमिताभ बच्चन ने फोन किया और मुझे और मेरे पिता को घर बुलाया. उन्होंने अच्छे से बात की और फिर मेरे पिता से पूछा, ‘रामराज जी, हमसे क्या गलती हुई है?’ मेरे पिता ने जवाब दिया, ‘कुछ नहीं’, तो उन्होंने पूछा, ‘फिर आपने ऐसा क्यों लिखा?’ मेरे पिता ने कहा, ‘लेकिन यह सच है.’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन, नहीं, फिल्म को थोड़ा समय दें.’ कोमल ने कहा कि इस घटना के बाद, कई पत्रिकाओं ने ‘नाहटा-बच्चन वार’ के बारे में लिखा और ‘पूरे बॉम्बे में बैनर लगे थे जिन पर लिखा था, ‘नाहटा-बच्चन वार.’

सालों तक बंद रही बातचीत
कोमल ने कहा कि इस घटना के बाद, अमिताभ ने कुछ समय तक उनसे बात नहीं की. उन्होंने कहा, ‘बच्चन सर ने मुझसे बात नहीं की, न ही मैंने उनसे बात की.’ कोल्ड वार तब तक जारी रहा जब तक बच्चन ने ‘अग्निपथ’ के लिए अपना राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार नहीं जीता. कोमल ने याद करते हुए आगे कहा, ‘वह इतने विनम्र थे कि उन्होंने फोन उठाया और कहा, ‘कोमल, मैंने यह जीता है. हम एक पार्टी कर रहे हैं. प्लीज आइए.’

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फिल्म ने 37वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में 4 पुरस्कार जीते थे.

सब भुलाकर जब अमिताभ की पार्टी में शामिल हुए कोमल
उन्होंने बताया कि मैंने उन्हें बधाई दी. यह भी बड़ी बात बन गई कि कोमल, बच्चन की पार्टी में गए. कोमल ने कहा कि चूंकि महानायक ने उन्हें आमंत्रित करने की विनम्रता दिखाई, इसलिए मैंने भी सब कुछ भुला दिया गया और उनकी पार्टी में शामिल हुआ. अमिताभ भी बड़े प्रेम से मिले. उनके लहजे में कोई कड़वाहट नहीं थी. जैसे कुछ हुआ ही न हो.

1991 की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई वाली फिल्म
फिल्म ‘हम’ की बात करें तो ये एक एक्शन क्राइम फिल्म थी. 37वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में इस फिल्म ने 4 पुरस्कार जीते थे, जिसमें बच्चन के लिए बेस्ट एक्टर और चिन्नी प्रकाश के लिए ‘जुम्मा चुम्मा दे दे’ गाने के लिए बेस्ट कोरियोग्राफर का पुरस्कार शामिल है. यह साल 1991 की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.

क्या है फिल्म की कहानी
फिल्म की कहानी की बात करें तो साल 1975 में भक्तावर (डैनी डेन्जोंगपा) मुंबई के घाटों पर शासन करता है, अपने कर्मचारियों के साथ गुलामों जैसा व्यवहार करता है. इस शासन व्यवस्था से खुश न होने के बावजूद टाइगर (अमिताभ बच्चन) अपने पिता प्रताप (दीपक शिर्के) के लिए कर्मचारियों से पैसे वसूलता है. टाइगर अपने सबसे अच्छे दोस्त गोंसाल्वेस (रोमेश शर्मा) की बहन जुम्मा (किमी काटकर) से प्यार करता है. गोंसाल्वेस भक्तावर की नीतियों के खिलाफ है और भक्तावर द्वारा मारा जाता है. इसके बाद, टाइगर के पिता और सौतेली मां भी मर जाते हैं, जिससे उसके दो छोटे सौतेले भाई कुमार मल्होत्रा (रजनीकांत) और विजय मल्होत्रा (गोविंदा), टाइगर के पास रह जाते हैं. दोस्त और मां-पिता के निधन के बाद, टाइगर तुरंत भक्तावर को मारने के लिए निकल पड़ता है, लेकिन इंस्पेक्टर गिरधर (अनुपम खेर) उसे रोक लेता है. गिरधर टाइगर को याद दिलाता है कि वह अपनी मरती हुई सौतेली मां की इच्छा पूरी करे और अपने भाइयों की देखभाल करे, जबकि भक्तावर से निपटने के लिए पुलिस को छोड़ दे. आगे पूरी कहानी जानने के लिए आप इस फिल्म को ओटीटी अमेजन प्राइम वीडियो पर देख सकते हैं.

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