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Sunday, January 19, 2025

पिता के जाने के बाद संभाला परिवार, आंसुओं को छुपाकर निभा रही बेटी का फर्ज

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सहारनपुर: राहों में मुश्किलें हजार मिलेगी, हर एक मोड़ पर नई तकरार मिलेगी.
हिम्मत और हौसले से जो आगे बढ़ते हैं, मंजिल उनके कदमों में हर बार मिलेगी.” इन पंक्तियों को साकार कर दिखाया है सहारनपुर के गांव मनोहरपुर की रहने वाली टीना सैनी ने. जीवन के कठिन संघर्षों और जिम्मेदारियों को अपने मजबूत इरादों से संभालते हुए, टीना आज न सिर्फ अपने परिवार की रीढ़ बन गई हैं, बल्कि वे कई लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी हैं.

टीना की जिंदगी में संघर्ष का दौर उस समय शुरू हुआ जब वह सिर्फ 18 साल की थीं. उनके पिता योगेश सैनी का बीमारी के चलते निधन हो गया. परिवार की बड़ी बेटी होने के नाते, पूरे घर की जिम्मेदारी टीना के कंधों पर आ गई. उनके परिवार में मां संतोष, दादी कमला देवी, दो छोटी बहनें मेघा और पारुल, और छोटा भाई घनश्याम हैं.

पिता के निधन के बाद टूट चुकी मां ने मायके जाने की जिद की, लेकिन टीना ने अपने हौसले और संकल्प से परिवार को टूटने नहीं दिया. उन्होंने न केवल अपनी पढ़ाई छोड़ी बल्कि घर का खर्च उठाने का फैसला किया.

संघर्ष भरा सफर: छोटी दुकान से घर का खर्च
टीना के ताऊ विनोद और मामा अनिल ने उनकी मदद करते हुए एक छोटी सी कॉस्मेटिक की दुकान शुरू करने में सहयोग किया. इस दुकान से टीना महीने में सिर्फ 3-4 हजार रुपये कमाती हैं, लेकिन इसी से वह अपने छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई और परिवार का खर्च चला रही हैं.

छोटी बहन भी सिलाई-कढ़ाई का काम कर टीना का हाथ बंटाती है. दिन में दुकान संभालने के बाद टीना रात में सिलाई-कढ़ाई करती हैं. अपनी शिक्षा को जारी रखते हुए, वह जे.वी. जैन डिग्री कॉलेज से प्राइवेट एम.ए. (इंग्लिश) कर रही हैं.

लड़कियों के लिए बनीं प्रेरणा
टीना का मानना है कि मुश्किल परिस्थितियों में भी यदि हौसला और जज्बा हो, तो लड़कियां भी लड़कों से कम नहीं हैं. उन्होंने यह साबित कर दिखाया है कि आत्मनिर्भरता और मेहनत से हर बाधा को पार किया जा सकता है.

संघर्ष के बीच आत्मनिर्भरता की राह
लोकल 18 से बातचीत में टीना ने बताया कि पिता के निधन के बाद उनका जीवन एकदम बदल गया. उनकी आंखों में आंसू भर आए, जब उन्होंने कहा, “पिताजी के जाने के बाद दुनिया खाली-खाली सी लगने लगी. लेकिन मैंने अपने आंसू पीकर परिवार की खुशियां बनाए रखने का संकल्प लिया.”

टीना ने आगे बताया कि स्कूल के दिनों में उनकी शिक्षिका लक्ष्मी त्यागी ने उन्हें सिलाई-कढ़ाई और बुनाई जैसे हुनर सिखाए, जो आज उनकी जिंदगी में बेहद अहम भूमिका निभा रहे हैं. इन्हीं कौशलों के सहारे वह अपने परिवार को पाल रही हैं.

दुखों को छुपाकर आगे बढ़ने का जज्बा
टीना कहती हैं, “जब पिता की याद आती है, तो मैं अकेले में रो लेती हूं. किसी को अपने दुख का अहसास नहीं होने देती. लोग मुझे और मेरे परिवार को अलग नजरिए से देखते हैं, लेकिन मैं किसी की परवाह नहीं करती.”

Tags: Local18, Success Story



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