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Premanand Maharaj: प्रेमानंद महाराज सोशल मीडिया पर आजकल छाए रहते हैं. रील्स स्क्रॉल करने पर खुद-ब-खुद उनका वीडियो सामने आ जाता है. वे अपने सत्संग के माध्यम से लोगों को सांसारिक और आध्यात्मिक जीवन का ज्ञान देते …और पढ़ें
मुस्लमानों के मन में प्रेमानंद महाराज को लेकर ये बात.
हाइलाइट्स
- प्रेमानंद महाराज के सत्संग में भारी भीड़ रहती है.
- मुस्लिम शख्स ने बताया चौंकाने वाली बात
Premanand Maharaj News: आज के समय में राधारानी के परम भक्त प्रेमानंद जी महाराज को भला कौन नहीं जानता है. प्रेमानंद महाराज की ख्याति आज देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में फैल चुकी है. यही कारण है कि उनके भजन और सत्संग को हर कोई सुनता है. उनके सत्संग में भक्तों की भारी भीड़ लगी रहती है. उनसे मिलने दूर-दूर से लोग आते हैं. आम आदमी ही नहीं क्रिकेटर, फिल्म जगत से जुड़े लोग सभी उनके पास धर्म और जीवन का ज्ञान लेने पहुंचते हैं. प्रेमानंद महाराज से जुड़ी हर इक छोटी बात लोग जानना चाहते हैं. ऐसे में अक्सर सोशल मीडिया पर उनके वीडियो छाए रहते हैं. अब एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक मुस्लिम शख्स ने प्रेमानंद महाराज को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि मुस्लिमों के दिलों में आखिर संत को लेकर क्या धारणा है. लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं. आइए जानते हैं सबकुछ…
इस शख्स ने खोला राज
कथाकार मोहम्मद फैज खान ने प्रेमानंद महाराज को लेकर कई सारी बातें की. उनसे जब पूछा गया कि संत को आप पसंद करते हो? आप उन्हें मानते हैं? तो उन्होंने तपाक से जवाब दिया बिल्कुल. प्रेमानंद महाराज देश के सर्वश्रेष्ठ संत है.आप उनके कमेंट सेक्शन में देखोगे तो आप समझ जाओगे.
उन्होंने कहा कि एक भी मुसलमान ने अगर उनके कमेंट बॉक्स में नेगेटिव कमेंट किया हो तो मुझे बताओ. कोई नहीं कर सकता यानी मुसलमान भी प्रेमानंद जी महाराज को पसंद करते हैं. प्रेमानंद जी महाराज की शिक्षा बिलकुल सब पसंद करते है. हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सब उन्हें प्यार करते हैं. क्योंकि प्रेमानंद जी महाराज वही है जो असली सनातन परंपरा स्वीकार करते हैं.
संन्यासी कैसे बने महाराज?
कहा जाता है कि भोलेनाथ ने स्वयं प्रेमानंद महाराज को दर्शन दिए थे. इसके बाद वे घर का त्याग कर वृंदावन आ गए. लेकिन क्या आप जानते हैं कि, प्रेमानंद जी महाराज ने क्यों साधारण जीवन का त्याग कर भक्ति का मार्ग चुना और महाराज जी संन्यासी कैसे बन गए. इसके पीछे एक महिला का बड़ा हाथ है. दरअसल, प्रेमानंद से एक भक्त ने पूछा कि आप जब भागवत प्राप्ति के मार्ग पर चल रहे थे तो आपको सबसे अधिक किस प्रश्न ने परेशान किया था? इस पर संत ने कहा कि पहला प्रश्न तो हमारे अंदर ये था की मेरा है कौन?
उन्होंने आगे कहा कि जब मैं 13 साल की उम्र में स्कूल से वापस आता था तो कुछ ऐसी दृष्टि या पूर्व जन्म का भजन रहा होगा कि सबसे अधिक मां से प्रेम था. मां को जब बीमार हालत में देखते थे तो लगता कि वो नहीं रहेंगी. फिर इस सोच में पड़ जाते थे कि मां अगर नहीं रहीं तो मैं कैसे रह पाऊंगा. मेरा है कौन? तब समझ आया की जीवन का उद्देश्य भगवान हैं.