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Thursday, April 3, 2025

ये इनकम टैक्स विभाग को हुआ क्या, हजारों कमाने वालों को करोड़ों का नोटिस कैसे!

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उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक आश्चर्यजनक मामला सामने आया है, जहां आयकर विभाग ने तीन आम लोगों को अचानक करोड़ों रुपये के नोटिस भेजे हैं. यह नोटिस इतना बड़ा है कि इससे उनके लिए घर चलाना मुश्किल हो गया है, क्योंकि यह राशि उनकी जीवन भर की कमाई से भी अधिक है.

अलीगढ़ के बन्ना देवी थाना क्षेत्र के तार वाली गली में रहने वाले रईस, एक साधारण जूस विक्रेता, को आयकर विभाग ने 7 करोड़ 79 लाख 2 हजार 457 रुपये का नोटिस भेजकर हिला दिया है. रईस के लिए यह नोटिस एक बड़ा सदमा है. उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे इतने बड़े वित्तीय विवाद का हिस्सा बनेंगे. रईस ने अपनी बात रखते हुए कहा, “मैंने हमेशा मेहनत से अपना घर चलाया है. मुझे नहीं पता कि यह नोटिस क्यों आया है. मेरी सरकार से अपील है कि मेरी मदद की जाए.

रईस अकेले नहीं हैं जिन्हें आयकर विभाग का नोटिस मिला है. योगेश शर्मा भी इसी तरह के सदमे से गुजर रहे हैं. आयकर विभाग ने योगेश को 11 करोड़ 11 लाख 85 हजार 991 रुपये का नोटिस भेजा है, जिससे उनका परिवार भारी दबाव में आ गया है. योगेश की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी, और अब यह नोटिस उनके लिए एक बड़ा संकट बन गया है.

योगेश शर्मा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि उनके पास पैसे नहीं हैं, यहां तक कि उनकी बिजली भी कटी हुई है. उन्हें आयकर विभाग से मिला नोटिस एक बड़ा धोखा लगता है. योगेश ने कहा कि उनके पास कुछ नहीं है, तो इतनी बड़ी रकम क्यों मांगी जा रही है? उन्होंने प्रधानमंत्री से मदद की गुहार लगाई है.

करण कुमार की कहानी भी रईस और योगेश से मिलती-जुलती है. करण स्टेट बैंक में चतुर्थ श्रेणी के संविदा कर्मचारी हैं और उनकी मासिक आय मात्र 15 हजार रुपये है. लेकिन आयकर विभाग ने उन्हें 33 करोड़ 88 लाख 368 रुपये का नोटिस भेजकर उनकी जिंदगी को उल्ट-पुलट कर दिया है. यह खबर सुनकर करण को बड़ा झटका लगा है.

रईस, योगेश और करण, ये तीनों आम आदमी हैं जिनका जीवन संघर्षों से भरा हुआ है. लेकिन अचानक इन्हें करोड़ों का आयकर नोटिस मिलने से कई सवाल खड़े हो गए हैं. क्या इनके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया गया है? या फिर यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है? इन सवालों के जवाब ढूंढने के लिए जांच की आवश्यकता है.

सरकारी एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं, जिसमें संदेह जताया गया है कि इन नागरिकों के पैन और आधार कार्ड का दुरुपयोग किया गया है. यह सवाल उठता है कि क्या यह कोई संगठित गिरोह है जो इन दस्तावेजों का दुरुपयोग कर रहा है? अगर ऐसा है, तो यह किसी के साथ भी हो सकता है. सरकार को इस मामले की गहराई से जांच करनी चाहिए और निर्दोष नागरिकों को न्याय दिलाना चाहिए. 

अदनान खान की रिपोर्ट




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