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Tuesday, April 16, 2024

यूपी चुनेगा देश की सरकार…3 चुनाव का एनालिसिस: 15 साल में भाजपा की सीटें 5 गुना बढ़ीं, कांग्रेस की 20 गुना घटीं; चुनावी तैयारियों में BJP आगे

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लखनऊ2 घंटे पहलेलेखक: अभिषेक श्रीवास्तव

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2024 में दिल्ली की कुर्सी पर कौन बैठेगा? इस सवाल का जवाब…उत्तर प्रदेश है। अब जब लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। तारीखों का ऐलान हो चुका है, तो फिर सबकी नजरें यूपी पर टिकी हैं। क्योंकि, यूपी से होकर ही दिल्ली का रास्ता तय होता है। 2014 में यूपी की 80 सीटों में से 73 NDA गठबंधन ने जीतीं। 2019 में यह आंकड़ा कम होकर 62 सीटों तक पहुंच गया। दोनों बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने।

15 साल में यूपी में भाजपा की सीटें 5 गुना बढ़ीं हैं, जबकि कांग्रेस की सीटें 20 गुना घटीं हैं। अगर 2019 की बात की जाए तो भाजपा के आगे बाकी दल बिखर गए। कांग्रेस ने अकेले 67 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा। इसमें 63 पर उसके प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। राहुल अमेठी से हार गए।

सिर्फ एक सीट रायबरेली से सोनिया गांधी जीतीं। वहीं, सपा, बसपा और रालोद गठबंधन करके एक साथ मैदान में आए। वोट शेयर के लिहाज से देखा जाए तो भाजपा को 50% वोट मिले। जबकि बसपा को 19.4%, सपा को 18% और रालोद को 1.7% हासिल किए।

अब 2024 है। सियासी समीकरण बदल चुके हैं। सहयोगी पार्टियों का पाला बदल चुका है। प्रदेश में मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा-कांग्रेस के बीच है। इसमें रालोद भाजपा के साथ है। 2014 यानी 10 साल से भाजपा यूपी पर पकड़ बनाए हुए है। दो विधानसभा (2017 और 2022) में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला।

चलिए, 2024 की तैयारी, पिछले तीन लोकसभा चुनाव के आंकड़ों से यूपी को समझने की कोशिश करते हैं। पहले…ये ग्राफिक्स देखिए

चलिए, अब 2024 में गठबंधन का गणित समझते हैं…

भाजपा ने राजभर-जयंत से हाथ मिलाया, 2019 में इनका वोट शेयर 52.9% था
भाजपा ने 2024 चुनाव के लिए यूपी में 80 का टारगेट रखा है। यानी, हर सीट पर जीत। इसे पाने के लिए भाजपा ने अपने दो पुराने दोस्तों से हाथ मिलाया है। ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा और जयंत की रालोद। जबकि पुराने सहयोगी अपना दल (एस) और निषाद पार्टी भी गठबंधन में हैं।

2019 के वोट शेयर पर नजर डालें तो NDA के इस बार के सहयोगियों का उस वक्त कुल वोट प्रतिशत 52.9 रहा है। वहीं, अगर 2022 में हुए विधानसभा चुनाव पर नजर डालें तो एनडीए गठबंधन की इन 4 पार्टियों का वोट प्रतिशत 47.2 रहा।

अखिलेश-राहुल साथ आए, 2019 में सपा-कांग्रेस का कुल वोट शेयर 24.5% था
यूपी में सपा और रालोद का गठबंधन हो चुका था। लेकिन, ऐन वक्त पर रालोद भाजपा के साथ चली गई। इसके बाद अखिलेश ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया। 2019 चुनाव में इन दोनों दलों यानी सपा और कांग्रेस का वोट शेयर 18.1% और 6.4% रहा। यानी कुल 24.5%। वहीं, 2022 विधानसभा की बात की जाए तो सपा को 32.3 और कांग्रेस को 2.4% वोट शेयर था। यानी कुल 34.6%। तब दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था।

2024 के लिए लिए दलों की अब तक की तैयारी…

1) भाजपा ने 50 में मौजूदा 47 सांसदों को उतारा
यूपी में 2 मार्च को ही भाजपा ने 51 नाम की पहली सूची जारी कर दी थी। इसमें 47 सीटों पर मौजूदा सांसदों को टिकट दिया था। बाराबंकी प्रत्याशी ने टिकट वापस कर दिया। अब संख्या 50 रह गई है। 4 पर नए चेहरे को उतारा है।

भाजपा ने इस लिस्ट में अखिलेश यादव के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले का जवाब देने की कोशिश की। 50 नाम की लिस्ट में ओबीसी के 21, सामान्य वर्ग के 18 और 11 दलित ​​​​​​प्रत्याशियों को टिकट दिए। इसके अलावा, 9 केंद्रीय मंत्रियों को भी टिकट दिया है।

भाजपा की तैयारी को इससे भी समझा जा सकता है कि पीएम नरेंद्र मोदी एक महीने में 3 बार यूपी आए। इसके अलावा, सीएम योगी ने भी एक महीने में 50 से ज्यादा जिलों में सभाएं की।

2) सपा ने 37 प्रत्याशी उतारे, कांग्रेस की चुप्पी
सपा अब तक 37 सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान कर चुकी है। इसमें भदोही सीट टीएमसी को दी है। चुनाव के लिए सपा ने सबसे पहले 30 जनवरी को ही पहली लिस्ट जारी कर दी थी। इसमें डिंपल यादव, अक्षय यादव का नाम था। सीट शेयरिंग फॉर्मूले के तहत सपा ने 17 सीटें कांग्रेस को दी है। लेकिन, अभी तक कांग्रेस ने एक भी प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।

इन 17 में से 16 सीट पर कांग्रेस 2019 में चुनाव हार चुकी है। रायबरेली-अमेठी प्रियंका या राहुल लड़ेंगे या नहीं? इसे लेकर भी सस्पेंस बना है।

3) बसपा का वेट एंड वॉच, 9 सीटों पर नाम सामने आए
2019 में करीब 19% वोट शेयर हासिल करने वाली बसपा ज्यादातर सीटों पर अभी वेट एंड वॉच कर रही है। बसपा इस बार अकेले चुनाव लड़ रही है। बसपा की तरफ से 9 प्रत्याशियों के नाम सामने आए हैं। इनमें मुस्लिम समुदाय से 5 प्रत्याशी हैं।

हालांकि, पार्टी ने इसकी अधिकृत घोषणा नहीं की है। सीटों पर बसपा ने अभी पत्ते नहीं खोले हैं। सिर्फ यही नहीं, ग्राउंड पर मायावती और बसपा के नेता नजर नहीं आ रहे हैं। मायावती ने अभी तक कोई भी चुनावी सभा नहीं की।

चलिए, अब पिछले 3 चुनाव के ट्रेंड को ग्राफिक्स से समझते हैं…

चलिए, अब 4 जोन में देखते हैं पार्टियों का प्रदर्शन कैसा रहा?



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