जातिवाद पर अटका गुजरात, अभी तक दलितों पर बनने वाली 4 वारदात आई सामने

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गांधीनगर

हर एक माँ बाप की तमन्ना होती है कि उसके बेटे-बेटी की शादी खूब धूम धाम से हो, शहनाई बजे और इस धूम धाम को बढ़ावा देने के लिए माँ- बाप छह महीने पहले से ही सहनाई बजने की तैयारी शरू कर देते है। शादी में दूर दूर से रिश्तेदार भी इस शादी का मजा लेने आते है लेकिन गुजरात मे कुछ दिनों से दलित की सहनाई को लेकर परिस्थिति तंग दिखाई दे रही है। शादी में घोड़ी पर बैठने और गांव के बीच से बारात को नाचते गाते ले जाते वक्त हुए हमलों को लेकर दलित नेता जिग्नेश मेवानी ने भी ट्वीट किया और लिखा कि… गुजरात दलितों के लिए बना नर्क बन गया है गुजरात मे लगातार चौथे दिन घोड़ी चढ़ने के मामले में दलितों पर जुल्म-अत्याचार हो रहे है महेसाणा के बाद अब अरवल्ली जिले के खंभासर गांव में दलित बहनों को बेरहमी के साथ मारा गया, कुछ लोग जान बचाने के लिए खेतों में छिप गए हैं. गुजरात में पिछले एक सप्ताह के दौरान एक या दो नहीं बल्कि चार ऐसी वारदात सामने आई है, जिसमें दलितो को बारात पुलिस सुरक्षा के बीच निकालना पड़ रहा है . इसे लेकर दलित नेता जिग्नेश मेवानी ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा है कि गुजरात दलितों के लिए नर्क बन गया है.

दलित की बारात रोकने की शुरुआत मेहसाणा जिले की कडी तहसील से हुई जहां एक दुल्हे की बारात क्या निकाली गांव के सरपंच समेत सभी सवर्णों ने गांव के दलितों का बहिष्कार करना शुरू कर दिया. यही नहीं गांव वालों ने उनके दूध, पानी, शब्जी जैसी जीवन निर्वाह की चीजें भी बंद कर दीं। शांति वाले इस गुजरात में, गांधी और सरदार पटेल के इस गुजरात मे इस समय जाती पाती का भेदभाव चल रहा है। दलितों पर हो रहे अत्याचार रुकने का नाम नही ले रहे वही पर रोज एक नई वारदात सामने आ जाती है

यही नहीं रविवार देर शाम अरवल्ली के मोडासा के खंबीसार गांव में जब दुल्हे जयेश राठौड़ घोड़ी पर चढ़ बारात निकालने की तैयारी कर रहे थे कि अचानक गाँव की सभी सवर्ण महिलाएं दूल्हे के आगे आकर खड़ी हो गई और कहने लगी कि दलितों की बारात घोड़ों पर नही निकलती, न ही उनके शहनाइयों में नाच गाने होते है। लेकिन इस घटना की जानकारी पुलिस को हुई तब कहि जाकर दुल्हे जयेश राठौड़ की बारात निकली।  एक तरफ लोकसभा चुनाव में मस्त भारतीय जनता पार्टी के नेता गुजरात का गुणगान अन्य राज्यों में जाकर गा रहे है तो दूसरी तरफ भारत के सँविधान को बनाने वाले बाबा साहब अंबेडकर की प्रजा जाती आज हर एक अधिकार के लिए तरस गई है । कई जगहों पर तो कितने दलित नागरिकों ने बोद्ध धर्म भी अपना लिया है। गुजरात मे पिछले पाँच सालो में आंदोलन और अत्याचार की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है जिसे कम करने में भारतीय जनता पार्टी का ये ढांचा सुलझाने में नाकाम हुआ है और जुर्म का ठिकाना बन गया है गुजरात। आये दिन दलितों पर जुर्म की शिकायत पुलिस की किताब में लिखी जा रही है तो दूसरी तरफ पुलिस ही दलितों को धमकियां देकर उन्हें डराने का प्रयास कर रही है आखिरकार क्या बताना चाहती है सत्ता वाली सरकार।

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