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Saturday, April 20, 2024

भास्कर ओपिनियन- केजरीवाल: आखिर वो दिन आ ही गया, जिसकी आहट पिछले एक साल से थी

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3 घंटे पहले

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जब दिल्ली की शराब नीति के मामले में पहले मनीष सिसोदिया और बाद में संजय सिंह गिरफ्तार हुए और गिरफ़्तारी को महीनों बीत गए, तो सब ने यही सोचा कि आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल असल में भारतीय जनता पार्टी की बी पार्टी हैं और वे दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने की होड़ में लगे अपने ही साथियों को धीरे- धीरे जेल में डलवाते जा रहे हैं।

केंद्र सरकार उनकी यानी केजरीवाल की महत्वाकांक्षा के इस पुण्य कर्म में उनका लगातार सहयोग करती जा रही है। लेकिन गुरुवार को केजरीवाल की गिरफ़्तारी के साथ ही ये तमाम आशंकाएँ धूमिल हो गईं। हो सकता है पहले कभी ऐसा रहा हो, क्योंकि भाजपा बहुत पहले से, ख़ासकर चुनावों के दौरान कांग्रेस से ज़्यादा महत्व आप पार्टी को देती रही है।

गिरफ्तारी के बाद अरविंद केजरीवाल को ED ऑफिस ले जाया गया था। उन्हें रातभर लॉकअप में रखा गया।

गिरफ्तारी के बाद अरविंद केजरीवाल को ED ऑफिस ले जाया गया था। उन्हें रातभर लॉकअप में रखा गया।

दरअसल, भाजपा जब आप पार्टी को ज़्यादा महत्व देती है तो कांग्रेस नेपथ्य में चली जाती है। जहां तक आप पार्टी का सवाल है, वो वोट तो हर प्रदेश में कांग्रेस के ही काटती है, इसलिए आप पार्टी को जितना ज़्यादा महत्व दिया जाता है, भाजपा की झोली वोटों से उतनी ही ज़्यादा भरती जाती है। यही वजह है कि जब दिल्ली के शक्तिशाली मंत्री मनीष सिसोदिया गिरफ्तार हुए तो लोगों ने समझा कि कुर्सी पर बने रहने के लिए इस तरह का कमाल सिर्फ केजरीवाल ही कर सकते हैं।

मनीष सिसोदिया के बाद सबसे शक्तिशाली समझे जाने वाले संजय सिंह भी जब जेल में डाल दिए गए तो केजरीवाल की केंद्र सरकार से मिलीभगत की आशंकाएँ और भी बलवती हो गईं। लेकिन गुरुवार को केजरीवाल की गिरफ़्तारी के बाद केंद्र से मिलीभगत की ये तमाम अफ़वाहें निराधार साबित हो गईं।

गिरफ्तारी के बाद संजय सिंह ने अपने घर के बाहर से हाथ हिलाकर समर्थकों का अभिवादन किया था। कार में बैठकर भी वह हाथ हिलाते हुए निकले थे।

गिरफ्तारी के बाद संजय सिंह ने अपने घर के बाहर से हाथ हिलाकर समर्थकों का अभिवादन किया था। कार में बैठकर भी वह हाथ हिलाते हुए निकले थे।

शराब नीति में गड़बड़ियों का मामला इतना बड़ा बन जाएगा, यह पहले किसी ने सोचा नहीं होगा। कम से कम दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार ने तो कभी नहीं सोचा होगा।

इससे पहले झारखण्ड की झामुमो सरकार भी इसी तरह के संकट से जूझी थी। उसके मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर लिया गया था और ईडी की गिरफ़्त में रहते हुए हेमंत सोरेन ने राज्यपाल को इस्तीफ़ा दे दिया था। हालाँकि केजरीवाल मंत्रिमंडल के कई साथी कह रहे हैं कि केजरीवाल बने रहेंगे और वे जेल के भीतर से भी दिल्ली की सरकार चलाने में सक्षम हैं।

ये बात और है कि इस तरह के बयान देने वाले तमाम आप नेताओं के मन में भी खुद ही मुख्यमंत्री बनने के लड्डू फूट रहे हैं। अब देखना यह है कि केजरीवाल जेल में रहते हुए दिल्ली की सरकार चलाते हैं या आप पार्टी में कोई नया नेतृत्व उभरता है।

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